Friday, January 12, 2018

दो नन्हे शावक


साढ़े नौ बजने वाले हैं. कुछ देर पहले जून का फोन आया. उन्हें लेह यात्रा की फ़िक्र है. वहाँ रहने, घूमने आदि का प्रबंध ठीक से हो सके इस बात की. आज वह भाई से दुबारा बात करेगी. सुबह जल्दी नींद खुल गयी थी. स्वप्न में जून को बिस्तर के बिलकुल नीचे की तरफ सोते देखा तो उन्हें उठाया कि ठीक से सो जाएँ, जैसे नन्हे को कहा करती थी. हो सकता है किसी जन्म में उनके मध्य यही संबंध रहा हो. जीवन रहस्यों से भरा हुआ है. अभी-अभी संत वचन सुने. परमात्मा सदा वर्तमान में मिलता है, अभी और यहीं. उसकी खोज भी एक दिन छोड़नी होती है. जिस क्षण मन में कोई इच्छा नहीं है तो वे परमात्मा में ही हैं. ध्यान में कितने ही अनुभव घटते हैं, लेकिन अनुभव करने वाला यदि बचा है तो अनुभव पूर्ण नहीं है.

आज सुबह उठने से पहले मन फिर सपने बुनने लगा. कभी गणित की पढ़ाई, कभी घर की चाबी नहीं है, यानि नींद खोलने के सारे उपाय किये आत्मा ने, पर मन ने कैसा उलझाया कि आधा घंटा यूँही बीत गया. सुबह जब जून ऑफिस गये तो गैरेज में एक बिल्ली का बच्चा दिखा, थोड़ी ही देर में दूसरा आ गया. इस समय आराम से कार के बोनट पर सोये हैं. उनके कई चित्र लिए, नन्हे को भेजे. उन्हें बिस्किट और दूध देकर आई पर वे आराम से लेटे हैं. उन्हें कुछ करने का भी मन नहीं है, गर्मी के कारण या उनका पेट भरा है शायद. अभी देखा वे लम्बी तान कर सोये हैं. कटोरी में दूध वैसे ही पड़ा है, कुछ देर पहले उनकी माँ आई थी, वही उनका पोषण करती है शायद. अभी कुछ और नहीं खाते-पीते, उन्हें देखकर अच्छा लग रहा है. नन्हे ने भी पूछा है उनके बारे में.


आज भी गर्मी बदस्तूर जारी है. बादल सारे देश के अन्य भागों को सरसाने चले गये हैं. आज जून का लंच दफ्तर में ही है, कोई विदाई पार्टी है. शाम को उसे भी एक विदाई पार्टी में जाना है. आज ही धोबी, माली, दूधवाले आदि का हिसाब कर दिया है, कल उन्हें यात्रा के लिए निकलना है. नन्हे शावक आज भी गैराज में आराम फरमा रहे हैं. उसके भीतर शांति है, यानि परमात्मा का साथ है ! आत्मा को अपने मूल संस्कारों की तरफ हर हाल में लौटना ही है ! छोटी ननद का फोन आया, वह हरिद्वार में एक आश्रम में रह रही है कुछ दिनों के लिए. सभी आत्माएं घर लौटना चाहती हैं. लद्दाख की यात्रा उनके लिए अवश्य सुखद होगी. नया अनुभव होगा, नये स्थान, नये लोग मिलेंगे !

Wednesday, January 10, 2018

बगीचे में काली मुर्गी


शाम के पाँच बजने को हैं, बाहर तेज धूप है, सो अभी लॉन में जाने के लिए आधा घंटा प्रतीक्षा करनी होगी. मालिन बर्फ मांगने आई थी, वे एयर कंडीशन कमरे में बैठे हैं, उनके यहाँ बहुत गर्मी होगी. बरामदे से एक जंगली काली मुर्गी मुँह में अपने से भी बड़ा एक घास का टुकड़ा लेकर दौड़ते हुए दिखी,  हुए दिखी, दूसरी अपनी पूँछ हिलाकर मुँह से आवाज कर रही थी. वे जाने किस भाषा में बातें कर रही थीं. उन्हें भी ऐसा ही लगता होगा कि अन्य प्राणी किस भाषा में बात करते हैं ! ‘भारत एक खोज’ में आज औरंगजेब का द्वितीय भाग देखा. नब्बे वर्ष तक जीया था वह अपने भाइयों व पिता को मरवा व कैद करवा कर. आगे शिवाजी का प्रकरण आरम्भ होगा. दोपहर को एक स्वप्न देखा. एक नन्हा बच्चा उसकी गोदी में है और कुनमुना रहा है. उसे चुप कराते उठा लेती है और वह लिपट कर सो जाता है. नैनी माँ बनने वाली है शायद इसी से जुड़ा हो यह स्वप्न या फिर ओशो की उस बात से कि हर स्त्री माँ होती है और तब जून का भी ख्याल हो आया. मन कृतज्ञता से भर गया था. परमात्मा ही तो विभिन्न रूपों में आकर उनकी मदद करता है. जीवन कितना विचित्र है. यहाँ रहस्यों की परतें कभी समाप्त ही नहीं होतीं. सुबह उठी तब भी एक विशेष स्वप्न देखा था, अब जरा भी याद नहीं है पर तीन बजे थे. नन्हे से बात की, वह घर पर ही था. भोजन की समस्या अब उसकी हल हो गयी है. उसके कॉलेज के फोटो फेसबुक पर पोस्ट किये वह उनींदा लग रहा है. शांति निकेतन की यात्रा के चित्र भी प्रकाशित किये. कल बीहूताली यानि ओपन थियेटर में योग कैम्प है, वह नौ बजे जाएगी. विश्व योग दिवस मनाया जा रहा है.

आज मौसम कल रात की गर्जन-तर्जन के बाद ठंडा है. उसे लग रहा है, प्राणशक्ति कुछ कम हुई है. ध्यान जो नहीं किया, रात को शोर से नींद खुल गयी. परमात्मा से जुड़े रहकर ही वे प्राणवान बनते हैं. आज शाम को मीटिंग है, क्लब का संविधान बन रहा है. फेसबुक पर रश्मिप्रभाजी ने परिकल्पना ग्रुप में उसे शामिल किया है. उसके ब्लॉग का जिक्र किया है. वह बहुत कर्मशीला हैं और सभी को जोड़कर रखना उनका स्वभाव है. उनके भीतर ऊर्जा का एक अनंत स्रोत है जो इस उम्र में भी उन्हें इतना गतिशील बनाये है.

मौसम ने फिर मूड बदला है, गर्मी है बाहर. वृक्षों के नीचे भी हवा महसूस नहीं हुई. पिछले कई दिनों से वह वहीं टहलते हुए चाय पीती थी. पूना के आकाश में कल पूर्ण इन्द्रधनुष देखा गया जिसे ब्रह्म धनुष का नाम दिया गया है. आज फेसबुक पर नन्हे के चित्र में उसका एक मित्र भी था, जाने कैसे उसने देख ली और फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज दी है. नन्हे का वह तिब्बती मित्र कुछ दिन उनके यहाँ रहा था. अच्छा लगा था. उसने बौद्ध धर्म पर दो किताबें भी भेजी थीं. अब पढ़ने से शायद कुछ और प्रकाश मिले, उसने सोचा पुनः उन्हें निकालेगी.  

Tuesday, January 9, 2018

रिमझिम गिरे सावन


दोपहर का वक्त है, आसमान बादलों से ढका है. ढाई बजने वाले हैं. आज सुबह की प्रार्थना में कुछ ऐसा घटा है कि भीतर का मौन घना हो गया है, जैसे कोई मिट गया है भीतर जो बहुत शोर मचाता था. अब कोई नहीं है जो खोज रहा था, जिसे तलाश थी. क्योंकि वहाँ कुछ भी नहीं है जिसे पाया जा सके. न संसार में कुछ है न परमात्मा में कुछ है. एक परम मौन के अतिरिक्त कुछ भी तो नहीं है वहाँ, कुछ पाने को नहीं है. सत्य इस क्षण सम्पूर्ण है, न कुछ जोड़ना है उसमें न कुछ घटाना है. वहाँ कुछ है ही नहीं, जिसमें जोड़-तोड़ हो सके. पाने वाला ही झूठ है तो पायेगा कौन ? और पायेगा क्या ? जब वहाँ शून्य के सिवा कुछ है ही नहीं. जब कोई चाह नहीं बचती तो कुछ करने को भी नहीं रहता और न ही जानने को, क्योंकि जानने वाला ही नहीं बचता. जून आज गोहाटी गये हैं. अगले दो दिन पूर्ण मौन में बीतेंगे, कितने सही समय पर यह अनुभव घटा है. बाहर घास काटने वाली मशीन शोर कर रही है. नैनी मशीन पर सिलाई कर रही है पर भीतर का सन्नाटा उससे भी मुखर है. शाम को एक उच्च अधिकारी की पत्नी से बात करनी है, उनके लिए विदाई कविता लिखेगी. परसों पिताजी की बरसी है. बच्चों को बुलाकर खिलाना है. लेह जाने की तैयारी शुरू कर दी है.

आज सुबह से वर्षा नहीं हुई, हवा चल रही है. शाम के चार बजने को हैं. सुबह एक सखी के यहाँ गयी, वह अपने बगीचे के लिए कुछ और पौधे लायी है. बगीचे की हरियाली जून में देखते ही बनती है. दोपहर को जून का फोन आया था. उन्हें अपने यहाँ एक प्रोजेक्ट के लिए दो वर्षों हेतु एक रिक्त स्थान की पूर्ति के लिए इन्टरव्यू लेने थे. कुल साठ अभ्यार्थी आये थे, चालीस का साक्षात्कार लंच से पहले हो गया था, शेष का होना था.

रिमझिम के तराने लेके आयी बरसात.! अभी-अभी बादल बरसने लगे हैं, धरती तृप्त हुई है, पंछी, पादप सभी झूम रहे हैं. जैसे परम बरसता है भीतर तो मन की धरती अंकुआने लगती है, मन भीग-भीग जाता है. आज पिताजी की दूसरी बरसी है. दोनों ननदों में से किसी का फोन नहीं आया है, न जून यहाँ हैं न ही नन्हा. जीवन ऐसा ही है, जो चला गया उसे जगत भूल जाता है. इन्सान जब तक है तब तक ही है, और भक्त तो तब भी, होकर भी नहीं ही है, केवल परमात्मा ही है, वह मिटकर ही तृप्ति पाता है. उसका होना भी क्या जो परमात्मा के बिना हो और सबसे बड़ी बात ऐसा करने में ही उसका हित है. वह अपने लिए ही ऐसा करता है, परमात्मा को भला किसी से क्या लेना. अहंकार का भोजन दुःख है और समर्पण का अर्थ है परम शांति, और इस शांति का अनुभव तो भक्त को ही होने वाला है, परमात्मा तो पहले से ही शांत है. वर्षा तेज हो गयी है.


जून वापस तो आये पर सीधे ऑफिस चले गये. उनके भीतर कार्य के प्रति समर्पण बढ़ा है, वैसे भी जिम्मेदारी बढ़ी है तो व्यक्तिगत सुख त्यागना ही होगा. शाम को मीटिंग है उसे जाना है. सुबह बाजार से लौट रही थी तो भीतर गायन स्वयं से उतर आया. धुन सहित गीत बजने लगा जैसे कोई भीतर से गा रहा हो. परमात्मा कितना सृजनात्मक है ! 

Thursday, December 28, 2017

पृथ्वी की गंध


रात्रि के सवा आठ बजे हैं. अभी-अभी वे बाहर से टहल कर आये हैं, रात की रानी की ख़ुशबू से बगीचा महक रहा है, सड़क पर आने-जाने वाले भी पल भर के लिए थम जाते होंगे, एक छोटी सी टहनी कमरे में लाकर रख दी है. पता नहीं धरती के गर्भ में कितनी गंध छुपी है, अनगिनत प्रकार की गंध लिए है पृथ्वी, जिन्हें युगों से वह लुटा रही है. शाम को मूसलाधार पानी बरसा, उन्होंने बरामदे में कुछ देर चहलकदमी की, टहलते हुए वह जून से दिनभर का हाल-चाल ले लेती है, कमरे में आकर बैठकर बातें करने में एक औपचारिकता सी लगती है. अकबर की मृत्यु हो गयी आज के अंक में. उसका पुत्र सलीम ही जहांगीर के नाम से मशहूर हुआ. कल दोपहर को नींद खोलने के लिए अस्तित्त्व ने कितना अच्छा उपाय किया, सचमुच ‘गॉड लव्स फन’ वह एक कार में है, दो सखियाँ भी हैं, ड्राइवर उतर गया है पर कार अपने आप ही चलती जा रही है. आगे जाकर टकराती नहीं है, पीछे लौटती है और तभी नींद खुल जाती है. ईश्वर हर क्षण उसके साथ है, उसका साथ इतना हसीन होगा, कभी नहीं सोचा था. आज से दो हफ्तों के बाद उन्हें लेह जाना है, कल से उसके बारे में कुछ पढ़ेगी. मंझला भाई अस्वस्थ है, अभी देहली में है, उनके जाने तक वह अवश्य ठीक हो जायेगा. बड़े भाई अपनी बिटिया के साथ छोटी बहन के पास विदेश गये हैं.

दोपहर को संडे क्लास में जाने के लिए जैसे ही तैयार होकर बाहर निकली, अचानक तेज वर्षा आरम्भ हो गयी, पूरे चालीस मिनट होती रही, रुकने पर वहाँ पहुँची तो कोई बच्चा नहीं था, या तो वे आकर चले गये अथवा आये ही नहीं. नन्हे से बात की, उसका एक मित्र मोटरसाईकिल से ‘भारत यात्रा’ पर निकला है, शायद उन्हें भी लेह में मिले, वह उन्हीं तिथियों में वहाँ जाने वाला है. कल उसके सहकर्मियों ने उस घर में एक भोज समारोह किया जहाँ से छह वर्ष पूर्व कम्पनी की शुरुआत हुई थी. सुबह अजीब सा स्वप्न देखा, उसका अर्थ था, साधना करके यदि कुछ पाने की, कुछ बनने की चाह है तो साधना व्यर्थ है. परमात्मा को पाकर यदि अपना कद ही ऊंचा करना है तो उससे कभी मिलन होगा ही नहीं. स्वयं को पवित्र करना ही साधना का उद्देश्य है. भीतर यदि कोई भी चाह शेष है तो चित्त शुद्ध हुआ ही नहीं. परमात्मा कितनी अच्छी तरह से उसे पढ़ा रहा है. वह कभी स्वप्नों के माध्यम से, कभी सीधे शब्दों के माध्यम से उसे मार्ग पर ले जा रहा है. वह कितना कृपालु है. उसकी महिमा को कौन जान सकता है. आज से औरंगजेब की कहानी शुरू हुई है. देश में मोदी जी नये-नये कदम उठा रहे हैं ताकि भारत की समृद्धि बढ़े, विश्व में उसका नाम हो !  


आज वर्षा रुकी हुई थी सो स्कूल में बच्चों को बाहर मैदान में योग कराया. उन्हें योग दिवस के बार में भी बताया. दोपहर को लद्दाख की तस्वीरें देखीं, जानकारी हासिल की जो वहाँ जाने वाले यात्रियों के लिए आवश्यक है. वहाँ ठंड भी होगी और वर्षा भी. जलरोधी वस्त्र और जूते ले जाने होंगे. आज पुनः मन में एक खालीपन है, आश्चर्य भी होता है ऐसी अनुभूति पर, लेकिन ईश्वर के मार्ग पर तृप्ति का अर्थ है पूर्ण विश्राम. यानि रुक जाना, पर यहाँ तो चलते ही जाना है, इसका कोई अंत नहीं ! कल जून को गोहाटी जाना है दो दिनों के लिए. उसे अधिक समय मिलेगा साधना के लिए, पर साधना का लक्ष्य तो सभी के साथ एक्य की भावना का अनुभव करना ही है, जो वे इसी क्षण कर सकते हैं. वे विशिष्ट हैं, यही भाव तो उन्हें अलग करता है. इस सृष्टि में सभी एक-दूसरे से जुड़े हैं, सभी की अपनी-अपनी भूमिका है, सभी महत्वपूर्ण हैं समान रूप से. यही भावना तो उन्हें परमात्मा के साथ भी जोड़ती है. परमात्मा साक्षी है, सभी पर समान कृपा करता है पर जो उससे प्रेम करता है अर्थात स्वयं को विशिष्ट नहीं मानता, उससे वह प्रेम से मिलता है. अस्तित्त्व उसका हो जाता है उतना ही, जितना वह अस्तित्त्व का !

Wednesday, December 27, 2017

अकबर महान


सुबह अलार्म सुना फिर बंद कर दिया. सवा चार बजे नींद खुली. कोई भीतर से कह रहा था, आलसी, प्रमादी..पर बहुत प्रेम था उसकी वाणी में. शीघ्रता से उठ गयी. वर्षा हो रही थी सो बरामदे में ही प्रातः भ्रमण हुआ. आज दोपहर के भोजन में घर की सब्जी बाड़ी में उगा कुम्हड़ा बनाया, कोमल और स्वादिष्ट था. सुबह एक परिचिता से बात हुई, उसे कटहल पसंद है. माली से तोड़ने के लिए कहा, उसने कई सारे तोड़ दिए हैं. प्रकृति कितनी उदार है, वह भरपूर देती है. वह भी कटहल के कटलेट बना रही है आज शाम. नन्हे से पूछा, अगले महीने उसके जन्मदिन पर क्या वे उसके लिए लड्डू बनाकर भेजें, पर उसने मना कर दिया, वह आजकल हल्का भोजन कर रहा है, ज्यादातर सूप और सलाद.

सुबह बहुत जल्दी नींद खुल गयी. मन में कोई स्वप्न  चल रहा था पर देखने वाला भी जागृत था. वर्षा लगातार हो रही है. लॉन में पानी भर गया है. आज नये कम्प्यूटर पर लिखा, लेखन का काम ज्यादा आनंददायक हो गया है. यह भी तो परमात्मा की कृपा है, बस एक ही शै है जो उसकी मर्जी से नहीं होती, उसके मन की अनवरत यात्रा..शायद वह भी उसकी ही मर्जी से होती है, क्योंकि होता है तो सब कुछ उसकी मर्जी से ही होता है. यहाँ कोई दूसरा है ही नहीं, एक ही तो सत्ता है ! जड़ के पीछे भी वही है. कल से अमेरिका यात्रा का वर्णन लिखना है. ह्यूस्टन की वह यात्रा जो बारह वर्ष पहले की थी उन्होंने.
साढ़े तीन बजे हैं दोपहर के, इस समय थमी है वर्षा. आकाश पर बादल अब भी बने हैं. आज सम्भवतः वे सांध्य भ्रमण के लिए जा पाएंगे. सुबह-सुबह परमात्मा के स्वरूप के बारे में चर्चा सुनी. मन में कुछ और उजाला हुआ, दिन दिन बढ़त आनंद..कितना सही कहा है भक्ति के बारे में. परमात्मा को कितना भी जान लो, कुछ न कुछ जानने को शेष रहता है, हरि अनंत हरि कथा अनंता..आज एक छोटी सी कविता लिखी..रात्रि को हुए अनुभव के आधार पर. छोटी बहन ने बताया वे लोग अगस्त में यहाँ आयेंगे उसके पूर्व बैंगलोर आश्रम में एडवांस कोर्स करेंगे और मैसूर में भी एक स्वास्थ्य शिविर में भाग लेंगे. बड़ी भांजी को एक संस्था ‘द यूनिवर्स’ से ईमेल आते हैं, अध्यात्म के अनुभव के लिए प्रेरित करने हेतु. उसने एक मेल का अर्थ पूछा है, बताते समय उसे लगा, भगवद गीता के किसी श्लोक का भावार्थ बता रही है. सत्य एक ही है, किसी भी कोण से उसकी व्याख्या करें एक तक ही पहुँचाती है. आज नन्हे की गोवा यात्रा के कुछ पुराने चित्र फेसबुक पर प्रकाशित किये, जब वह अपने कालेज से वहाँ गया था. जून ने बताया, लेह में इस वक्त काफी ठंड है, उन्हें ऊनी अंतर्वस्त्र खरीदने होंगे.

रात्रि के पौने आठ बजने को हैं. टीवी पर समाचार आ रहे हैं, यानि जून देख रहे हैं, अंततः वे दोनों धारावाहिक के चंगुल से बाहर निकल ही आये हैं. आज दिन भर मौसम सूखा रहा, बहुत दिनों बाद धूप निकली. अभी कुछ देर पूर्व बाहर टहल कर आये, रात की रानी की गमक से सारा बगीचा सुवासित हो रहा था. हरी घास पर नंगे पैरों चलने से ठंडक भर गयी भीतर तक. ‘भारत एक खोज’ में अकबर पर आधारित अंक देखा. अकबर महान के पुत्र सलीम, मुराद और दान्याल उसकी उम्मीदों पर खरे नहीं उतरते. युग-युग में यही कहानी दोहराई जाती है. चार दिन पहले ही नैनी कुछ एडवांस ले गयी थी, आज फिर आई, पर उसने मना कर दिया. बाद में सोचा, शायद उसके पति को काम नहीं मिला होगा, वर्षा जो हो रही थी. वे भी परमात्मा से मांगते हैं और वह किसी न किसी को निमित्त बनाकर उनकी इच्छा पूर्ण करता है. 

Thursday, December 21, 2017

नया कम्प्यूटर


आज भी मौसम भीगा-भीगा है. लगातार फुहार पड़ रही है. फेसबुक पर आज पिताजी के साथ अंतिम पिकनिक की तस्वीरें पोस्ट कीं, दो वर्ष पहले जनवरी माह की होंगी शायद. शाम को एक पुराने मित्र भोजन के लिए आ रहे हैं. उसके पहले बाजार जाना है, जून उसके लिए साड़ी लाये हैं, उसे पीको आदि के लिए देने. एक नई कविता लिखी, आज वह अनाम बहुत करीब लग रहा है, नयन बंद करते ही अंतर प्रकाशित हो उठता है ! अगले महीने जीजाजी का जन्मदिन है, उनके लिए भी कुछ पंक्तियाँ लिखीं. कम्पनी की तरफ से नया कम्प्यूटर इंस्टाल हुआ है आज. अभी मकैनिक स्कैनर व प्रिंटर को इंस्टाल कर रहे हैं. अब वह कार्ड्स आदि घर पर ही प्रिंट कर सकती है. इसी माह एक सखी का जन्मदिन है पर उससे बहुत दिनों से कोई बात नहीं हुई है. अगले महीने नन्हे का भी जन्मदिन है, उसके अगले जून का और बड़े भांजे का भी. सभी के लिए कुछ न कुछ लिखेगी. दीदी का जवाब भी आया है, उन्हें कविता अच्छी  लगी !

लंच तैयार है, समय हो चुका है, पर जून अभी तक आये नहीं हैं. आज ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ है. उनके दफ्तर में पौधे लगाने का कार्यक्रम है. कल शाम भी एक मीटिंग के कारण सात बजे घर लौटे. थोड़ी देर में ही मेहमान भी आ गये. ढेर सारी बातें कहीं, अपनी पत्नी और बिटिया से नोक-झोंक की बातें. उनकी पत्नी को एक स्वास्थ्य समस्या भी हो गयी है. उसे हाथों व पैरों में कॉर्न हो जाते हैं, जो पेनफुल हैं. उससे बात की तो पता चला शरीर में प्रोटीन की प्रतिक्रिया से ऐसा हो रहा है. नूना के भी बाएं हाथ के दो नाखूनों में सफेदी आ गयी है, शायद किसी तत्व की कमी है. पौने दस बजे वे गये. रात को सोने में देर हो गयी तो जून को देर तक नींद नहीं आई. सुबह उन्होंने जब यह बात कही तो उसके भीतर से किसी ने जवाब देना आरम्भ कर दिया. पता नहीं कहाँ से इतने शब्द निकलते हैं.  


आज असमिया सखी के पुत्र का जन्मदिन है, उससे बात करनी चाही, पर शायद उसका नम्बर बदल गया है, किसी और ने उठाया. आज सुबह उठी तो एक विचित्र अनुभव हुआ, भीतर शब्द लिखे हुए दिखाई दिए, यानि पश्यन्ति वाणी का एक रूप. फिर एक स्वप्न आया, जिसमें छोटी ननद भी थी. जून भी थे. तब जून और उसका संबंध अलग था. कितने सवालों का जवाब मिल जाता है जब पिछले जन्मों की स्मृति आती है. कल सुबह भी एक अनोखा स्वप्न देखा. सद्गुरू को देखा, वह जो उनके सद्वचन सुनती है, शायद उसी का परिणाम था यह स्वप्न. अंततः श्रवण एक मानसिक प्रसन्नता ही तो है यानि सुख की तलाश. ज्ञान सुनने से जो सुख पाना चाहती है उससे और इन्द्रियों से मिलने वाले सुख में क्या अंतर है ? अभी बहुत कुछ है जो ध्यान की गहराई में जाकर मिल सकता है और एक वह है कि संतोष कर बैठी है, शायद यह स्वप्न यही जताने आया था. दोपहर को बहुत गहरी नींद आयी, जैसे बहुत वर्षों पहले आया करती थी. इस समय शाम के सात बजे हैं, जून नये कम्प्यूटर पर काम कर रहे हैं, एक कनिष्ठ अधिकारी उनकी सहायता कर रहे हैं. शाम को उन्होंने स्वयं पेड़ से कटहल तोडा, जिसकी सब्जी उसने आज बनाई है. अब वह ‘भारत एक खोज’ का तीसवां अंक देख रही है. विजयनगर के पतन की कहानी है उसमें. नन्हे को सर्दी लग गयी थी. दोपहर को उससे बात हुई. अब पहले से बेहतर है. दफ्तर आया था, अपना ख्याल रखना जानता है. हरेक को स्वालम्बी होना ही है.      

Wednesday, December 20, 2017

मन के बादल


सुबह के नौ बजे हैं, वह स्कूल जाने के लिए गाड़ी का इंतजार कर रही है. वर्षा का मौसम आज भी बना हुआ है. पूरे देश में गर्मी बढ़ती जा रही है. क्लब की सेक्रेटरी यहाँ से जा रही हैं, एक दिन माली को भेजने को कहा था. सुबह-सुबह माली चला गया तो उन्होंने कहा, नाश्ता कर रहे हैं, बाद में आना. सही है कोई सुबह बिना बताये माली को भेज दे तो यही जवाब मिलेगा. उसने सोचा वह स्वयं जाकर मिलेगी. जून का फोन भी सुबह आया.

आज का दिन भी बीतने को है. सुबह दस बजे के बाद ही स्कूल में कार्यक्रम आरम्भ हुआ, जो वक्तृता तैयार करके ले गयी थी उसमें से कुछ ही बोला. शेष योग के महत्व के बारे में उस क्षण स्वतः स्फूर्त ही कहा गया. कुल मिलाकर कार्यक्रम अच्छा रहा. एक बजे घर लौटी.  जून आज दोपहर बाद आ गये हैं, इस समय एक उच्च अधिकारी के विदाई समारोह में शामिल होने क्लब गये हैं. उनकी पत्नी के लिए उसने भी एक कविता लिखी है, जो लेडीज क्लब के कार्यक्रम में सुनाएगी. आज उसका जन्मदिन है, शाम को छोटी सी पार्टी की. उसके पहले बच्चों को बुलाकर जलपान कराया. बच्चों ने कुछ गाकर, कुछ अभिनय करके भी दिखाया. परिवार के लगभग सभी सदस्यों से फोन पर बात हुई. छोटी बहन ने कहा, वे लोग अगस्त में असम आयेंगे. दो दिन बाद दीदी का जन्मदिन है, उनके लिए कुछ लिखेगी.

आज भी दिन भर बादलों वाला मौसम बना रहा. ऐसे ही विचारों के बादलों में आत्मा का सूर्य छिपा रहता है. आत्मा को पाए बिना कहाँ मुक्ति है, विचारों का अँधेरा जो भीतर है, उसमें आत्मा ही नहीं छिपती, अज्ञान भी छिपा रहता है. उस अंधकार को मिटाए बिना स्वयं को जाना नहीं जा सकता. भीतर गये बिना करुणा और प्रेम का जन्म नहीं होता, मोह के झूठे सिक्के को ही वे प्रेम के नाम पर चलाये जाते हैं.


साल का पाँचवा महीना शुरू हो गया. नया माह और नया सप्ताह एक साथ ही आरम्भ हुए हैं. एक जंगली मुर्गी का बच्चा शोर मचाता हुआ लॉन में घूम रहा है, शायद अपनी माँ को खोज रहा है. कितनी आतुरता है उसकी ध्वनि में. दोपहर के साढ़े तीन बजे हैं. वर्षा थमी है. झूले पर बैठे हुए ठंडी हवा के झोंके सहला रहे हैं. जून को आज फिर से कंधे से नीचे तक दर्द हुआ, प्रारब्ध का खेल ही कहा जायेगा. बहुत सी बातें उनके वश में नहीं होतीं, लेकिन स्वयं को देह और मन से अलिप्त रखने का प्रयास तो वे कर ही सकते हैं. प्रसन्न रहने के लिए यही जरूरी है. आज दोपहर महीनों बाद असमिया सखी का फोन आया, उसकी बेटी को दसवीं में पचानवे प्रतिशत अंक मिले हैं. आज पूर्णिमा है, लेकिन बादलों के कारण चंद्रमा के दर्शन शायद ही हों, फिर भी वे मून लाइट मेडिटेशन तो करेंगे ही. कल की मीटिंग अच्छी रही, उच्च अधिकारी की पत्नी बहुत भावुक हो उठी थीं. उसने कविता पढ़ी. प्रेम का बंधन बहुत रुलाता है !